जानिए ए.पी.जे अब्दुल कलाम को कॉलेज से निकाल देने वाली कहानी

तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतलाकर,

पते हैं जग में प्रशस्ति करतब अपना दिखलाकर।

राम धारी सिंह दिनकरजी की उपयुर्क्त पंक्ति की भाव को साकार करते हैं हमारे ए पी जे अब्दुल कलाम।
अनेक लोग होते है जो सपने बुनते हुए कल्पना के परीलोक में पहुँच कर इंद्रजाल मैं फँस जाते हैं। मगर कुछ लोग होते है जो सपने बोते ही नहीं, उसकी फसल काटते भी हैं। ऐसे ही एक महान पुरुष हैं वर्तमान युग के महान वैज्ञानिक मिसाइल मैन A.P.J अब्दुल कलम।
उन्होंने ने सुरक्षा अनुसंधान एवं विकास परिषद के नव नियुक्त प्रशिक्षु युवा वैज्ञानिकों को तो सपनों का पाठ पढ़ाया ही साथ में हर विश्व विद्यालयों के समारोह में मिले सम्बोधन के अवसर पे उन्होंने वहां के नवयुवकों एवं छात्रों को स्वप्न दृष्टा बनने का मंत्र दिया और उन सपनों को साकार करने के लिए प्रयत्न करते रहने की प्रेरणा दी।
स्वप्न और उत्साह को जोड़कर उन्होंने जीवन का राज मार्ग बनाया और उस उच्च पथ पर चलकर वे देश के शीर्ष वैज्ञानिक तथा देश के शीर्षस्थ राष्ट्रपति बने।

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APJ AABDUL KALAAM IN HIS COLLEGE DAYS

 

एक बार अपने college के दिनों में जब कलाम अपना project बना रहे थे तब की ये घटना है जो आपको इनके परिश्रम व लगन से संजो के रख देगी।

जब कलाम साहब ने अपना प्रोजेक्ट बना के अपने अध्यापक HOD को अपना रिपोर्ट दिया तो उसे देख के अध्यापक काफी नजरश हो गए। वे कलाम के हुनर और तेज से अच्छी तरह से वाकिफ थे। शायद इसलिए वे कलाम के प्रोजेक्ट से नाखुश थे। उनका मानना था की कलाम इससे काफ़ी अच्छा कर सकते हैं।

उन्होंने कलाम को भी यही कहा – ” अगर तुम ऐसे प्रोजेक्ट बनाओगे तो मुझे बड़े दुख के साथ तुम्हे काम नंबर देना पड़ेगा।” कलाम बड़े अच्छे से जानते थे की अगर उन्हें काम नंबर आएंगे तो वो अपना स्कॉलरशिप खो सकते हैं। स्कॉलरशिप के एलवा पढ़ने के लिए कोई और पैसे का साधन नहीं था। कलाम बौखला गए और उन्हीने अपने प्रोफेस्सर से कुछ दिन का समय मांगअ। जो प्रोफेस्सर ने दे दिया।

वास्तिविकता से अनुकूल, कलाम ने दबाव में अगले 3 दिन तक बिना सोए, ठीक से खाये नए designs बनाये। जिसे देख के उनके प्रोफेस्सर बहुत खुश हुए और उनकी मेहनत और परुश्रम के लिए उन्हें शाबाशी और सर्वाधिक अंक भी दिए। इसी तरह कलाम ने अपने स्कॉलरशिप को बचा लिया और अपने आप को पढ़ाई छोड़ने से भी।

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कलम ने तिरुची नगर के सेंट जोसेफ कॉलेज से स्नातक विज्ञान की डिग्री प्राप्त की और वे MIT से एरोनॉटिक्स इंजिनीरिंग की विशेष उपाधि से विभूषित थे। भारत के प्रथम satellite slv-III के प्रोजेक्ट डिरेक्टर रह कर इस project के विकास हेतु तनमन से लगे रहे।
फिर उन्होंने समग्र निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम की चीफ executive का भार संभालते हुए देश को विभिन्न प्रकार के बैलिस्टिक मिसाइल दिए। अपने कार्यकाल में उन्होंने देश को पटना दिया। जी हाँ PRITHVI, AGNI, TRISHUL, NAG और AKASH नामक पाँच मिसाइल। 27 जुलै 2015 को वे नवयुवकों को ससंबोधित करते हुए ही स्वर्ग सिधार गए। उनकी अनुपस्थिति से ये देश और विज्ञान अभी भी त्राहिमाम कर रहा है। कलाम जैसे सुपूत पे देश को नाज़ है, इस राष्ट्र के जनजन से कलाम को सलाम।